भोपाल। मध्यप्रदेश के सीहोर की एथलीट बुसरा खान ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स की 3000 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में अपना जलवा बिखेरते हुए शनिवार को गोल्ड मेडल जीता है। एथलीट बुसरा ने 10.04.29 मिनट का समय लेकर पहला स्थान हासिल किया। बुसरा खान का इस मंजिल तक पहुंचना इतना आसान नहीं था इसकी संघर्ष की कहानी कुछ इस तरह है।
बता दें बुसरा खान की कुछ महीनों पहले फैक्टरी ब्लास्ट में पिता चल बसे। आर्थिक तंगी की वजह से घर का सामान तक बिक गया। इसके बाद मां ने ढांढस बंधाया और बुसरा अपने लक्ष्य के लिए अडिग रही। बुसरा 2016 में 12 साल की उम्र में वह भोपाल की एथलेटिक्स एकेडमी में सलेक्ट हुई। यहां कोच एसके प्रसाद की निगरानी में प्रैक्टिस की। स्टेट लेवल पर मेहनत की और नेशनल लेवल पर सलेक्ट हुई। गोल्ड जीतने का सपना था, 2023 में वह पूरा हुआ। इससे पहले 2019 में ब्रान्ज मेडल मिला था। बुसरा को बचपन से ही दौड़ना अच्छा लगता था और दौड़ने का शौक था। पिता छोटी बहनों के साथ सीहोर के ग्राउंड ले जाते थे। जब तक वे थे, तब तक सब ठीक था लेकिन, उनके चले जाने के बाद परेशानियां बढ़ गईं। पिछले साल मई में सीहोर की केमिकल फैक्ट्री ब्लास्ट में पिता का देहांत हो गया। फैक्ट्री में मजदूरों के लिए मकान बने हैं और वहीं पूरा परिवार रहता था। घटना के बाद से सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया। जिस समय फैक्ट्री में घटना घटित हुई उस समय पिता फैक्ट्री की वर्कशाॅप पर काम कर रहे थे। काफी परेशानी के बाद भी बुसरा ने हिम्मत नहीं हारी, कोच ने हौसला अफजाई की और अंततः गोल्ड जीतकर ही मानीं।
