समझदार बने जागरूक रहें…
कोरबा। क्यूएलओएफ एप को कोरबा पुलिस ने गैर मान्यता प्राप्त घोषित कर दिया है। इसके लिए साइबर सेल ने एक वीडियो जारी कर लोगों को इस तरह के एप से ट्रेडिंग नहीं करने की सलाह दी है। साथ ही यह भी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी भी एप से कनेक्ट होकर ट्रेडिंग कर रहे हैं, वे सतर्क हो जाएं और अपनी मेहनत की कमाई का धन सुरक्षित रखें। पुलिस ने संदेश जारी करके लोगों को ठगी की शिकार होने से बचाने का प्रयास किया है. वहीं क्यूएलओएफ के बंद होने के बाद भी निवेशक अभी भी इसमें रूचि ले रहे हैं। कैसे आइए बताते हैं..
क्यूएलओएफ एप से ठगी करने वाले ऑनलाइन ठगों ने ऐसे फैलाया जाल..
छत्तीसगढ़ में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शिकार बनाने के लिए चेन सिस्टम का उपयोग किया। ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को जोड़े जाने पर उसका लाभ भी अधिक मिलता है। इस लालच में लोग पिछले करीब आठ माह से इसे ही पूरी ताकत से अपना कारोबार बना लिए थे और लाखों रुपए अपने बैंक खाते में आहरित कर रहे थे, यही वजह है कि अकेले कोरबा में शहर व ग्रामीण क्षेत्र के हजारों लोग इस ट्रेडिंग के जाल में फंस गए।
हैरत की बात यह है कि अभी भी केवाईसी शुल्क के नाम पर छह हजार रुपये जमा करने कहा जा रहा है। ऐसा नहीं करने वाले निवेशकों को क्यूएलओएफ खाता पूरी तरह बंद और पैसा वापस नहीं मिलने का डर दिखाकर तिथि पर तिथि बढ़ाई जा रही है. और आज फिर से एक दिन तिथि बढ़ाई गई है, इस बीच केवाईसी के लिए 6 हज़ार रुपए जमा करने वाले ऐसे निवेशकों को जिन्होंने लेवल पार करते हुए सैलरी कैटेगिरी में पहुंच गए हैं उनका सैलरी अमाउंट अभी भी उनके बैंक खाता में जमा किया जा रहा है. इसको देखते हुए लोग विश्वास करने लगे और केवाईसी करना जारी रखे हैं. इसकी एक वजह कंपनी द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप में लुभावना मैसेज भेजना भी है जिसका लोग भरोसा कर रहे हैं. खास बात तो यह है कि इस ट्रेडिंग कंपनी पर भरोसा कर कमाई करने के लिए मजदूर वर्ग, बिजनेस मैन से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग ने भी निवेश किया है.
आपको बता दें पिछले तीन दिनों से वाट्सअप के माध्यम से केवाईसी कराने के लिए प्रेरित किए जाने वाला मैसेज भेजा जा रहा है। इस दौरान यह भी जानकारी शेयर की जा रही है कि कितने लोग अब तक केवाईसी शुल्क जमा कर चुके हैं और उन्हें रकम मिल रहा है। जो अपना पैसा गंवा चुके हैं वह किसी तरह अब अपनी राशि निकाल लेने के फेर में ठगों द्वारा फेंके गए जाल में फंस रहे हैं। क्यूएलओएफ के ठगी की सोशल मीडिया और अखबारों में खबर विस्तार के साथ प्रकाशित प्रसारित हो रही है.
खबरें वायरल होने के बाद कोरबा पुलिस सतर्क हुई और साइबर सेल के एक्सपर्ट डेमन ओग्रे (आरक्षक) का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया में प्रसारित किया गया है जिसमें पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है कि क्यूएलओएफ एप मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने इस तरह के एप से राशि डूबने की आशंका जताई है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस तरह के एप से बचें। उन्होंने कहा है कि खास तौर पर केवाईसी के लिए किसी भी तरह से अपने दस्तावेज शेयर नहीं करें और न ही करने दें। इस तरह की ठगी से होने वाले नुकसान को भी वीडियो में बताया गया है। पुलिस की इस वीडियो के बाद क्यूएलओएफ से ट्रेडिंग करने वाले जरूर सतर्क होंगे, पर गंभीर बात यह है कि अभी भी सैकड़ों लोग केवाईसी शुल्क के नाम पर छह- छह हजार रूपये जमा कर रहे हैं और पैसे भी निकाल रहे हैं.
केवाईसी. जिसमे न आधार मांग रहे न पेनकार्ड
केवाईसी के नाम पर निवेशकों से 6 हजार रुपए मांगा जा रहा है, लेकिन ये कैसा केवाईसी है जिसमे न आधार कार्ड मांगा जा रहा है और न ही पेनकार्ड, 6 हजार जमा करने वाले निवेशक अभी भी ट्रेडिंग जारी रखे हुए हैं.