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सेना ने सूडान से 121 भारतीयों को निकाला: जर्जर हवाई पट्टी पर नाइट-विजन गॉगल्स से सी-130 कराया लैंड, गरूड़ कमांडो उतरे

दिल्ली। सूडान में युद्ध का दौर चल रहा है। यहां 121 भारतीय सूडान में फंसे हुए थे। भारतीय वायुसेना ने सूडान की जमीन पर उतरकर एक खतरनाक मिशन को अंजाम दिया। गरूड़ कमांडो की सुरक्षा में सी-130 जे सुपर हर्क्यूलिस विमान को रात में सूडान की जर्जर हवाई पट्टी पर उतारा गया। यहां फंसे 121 भारतीयों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित जेद्दाह पहुंचाया गया। हवाई पट्टी में घना अंधेरा होने के कारण पायलट ने नाइट विजन गॉगल्स की मदद ली और विमान को सुरक्षित लैंड कराया। भारतीय सेना ने अपनी तरह का यह पहला ऑपरेशन चलाया।
सूडान में सेना और अर्धसैनिक बल के बीच हिंसा जारी है। इस बीच भारत अपने लोगों को सकुशल स्वदेश वापस लाने के लिए ऑपरेशन कावेरी चला रहा है। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने एक बेहद साहसी ऑपरेशन को अंजाम दिया। गरुड़ कमांडो की सुरक्षा में सी-130जे जैसा सुपर हर्क्यूलिस विमान रात में सूडान की राजधानी खार्तूम से लगभग 40 किमी उत्तर में वाडी सैय्यिदना में एक छोटे से जर्जर हवाई पट्टी पर उतारा गया। वहां से 121 भारतीयों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित जेद्दाह पहुंचाया गया।  एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक हवाई पट्टी पर विजिबिलिटी बेहद कम थी। घना अंधेरा होने की वजह से पायलट्स ने नाइट विजन गॉगल्स की मदद से यहां विमान को लैंड कराया। भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि 27/28 अप्रैल की रात को यह साहसिक ऑपरेशन चलाया।
कैप्टन रवि नंदा के नेतृत्व में चला ऑपरेशनडिफेंस अधिकारियों ने बताया कि सी-130जे सुपर हर्क्यूलिस विमान के कैप्टन रवि नंदा हैं। उनके ही नेतृत्व में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। रवि इससे पहले भी पिछले साल अफगानिस्तान से भारतीयों को निकालने के लिए चलाए गए ऑपरेशन का हिस्सा थे। तब उन्हें गैलेंटरी मेडल से सम्मानित भी किया गया था।
बेहद खराब हालत में था रनवेदरअसल, खार्तूम से इन भारतीयों को भारत के रक्षा सैन्य सलाहकार लेकर आ रहे थे। उन्होंने विमान के कमांडर से लगातार संपर्क बनाए रखा। उनके पहुंचते ही सभी को एयरलिफ्ट कर लिया गया। सूडान के वादी सयीदिना में बना रनवे बेहद खराब हालत में था। यहां न तो नेविगेशन में मदद करने के लिए कोई मौजूद था, न फ्यूल का प्रबंध था और न ही लाइट थीं, जिनकी मदद से रात में विमान को लैंड कराया जा सके। इसके बावजूद वायुसेना के पायलट इस हवाई पट्टी पर लैंडिंग कराने में सफल रहे। रवने पर कहीं कोई रुकावट तो नहीं है, यह सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रा रेड सेंसर की मदद ली। ढाई घंटे तक हवाई पट्टी वायुसेना के कब्जे में रखी गई।
युद्ध की वजह से बंदरगाह नहीं पहुंच पा रहे थेअफसर ने बताया कि युद्ध की वजह से ये लोग बंदरगाह नहीं पहुंच पा रहे थे, जहां से नौसेना के युद्धपोत भारतीयों को जेद्दा लेकर जा रहे हैं। मुसीबत में फंसे नागरिकों को देखते हुए वायु सेना ने तत्काल सी-130जे सुपर हर्क्यूलिस रवाना कर दिया। इस पूरे ऑपरेशन पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने नजर बनाए रखी। अधिकारियों को जानकारी मिली कि राजधानी खार्तूम से सिर्फ 40 किमी दूर वाडी सयीदिना हवाई पटटी के पास भारतीय नागरिक जमा हैं। इनमें एक गर्भवती और कुछ बीमार लोग भी हैं। लैंडिंग के बाद भी पायलट ने विमान के इंजन को चालू रखा। लैंडिंग और टेक ऑफ में ढाई घंटे का समय लगा। इस दौरान 8 गरुड़ कमांडो लोगों के चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाकर खड़े रहे। इस पूरे समय तक हवाई पट्टी वायुसेना के कब्जे में रखी गई। गरुड़ कमांडो इस दौरान लोगों को विमान में चढ़ाने से लेकर उनके सामान को सुरक्षित रखने में मदद करते रहे। इसके बाद जिस तरह से विमान को उतारा गया था, उसी तरह नाइट विजन गॉगल्स का इस्तेमाल करते हुए उसे वहां से उड़ाया भी गया। खार्तूम से इन भारतीयों को भारत के रक्षा सैन्य सलाहकार लेकर आ रहे थे। उन्होंने विमान के कमांडर से लगातार संपर्क बनाए रखा। अधिकारियों के मुताबिक युद्ध में फंस जाने की वजह से ये लोग उस बंदरगाह पर नहीं पहुंच पा रहे थे, जहां से नौसेना के युद्धपोत भारतीयों को जेद्दा लेकर जा रहे हैं। वाडी सैयदना और जेद्दा के बीच चले इस ऑपरेशन को भारतीय वायुसेना के इतिहास के अत्यधिक साहसी और चूक रहित अंजाम के लिए याद किया जाएगा।

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